Saturday, April 21, 2018

BEST LIFE THOUGHTS

1.there is only one happiness in this life to love and be  loved →george sand
2.only i can change my life no one can do it for me→carol burnett
3. BE HAPPY FOR THIS MOMENT THIS MOMENT IS YOUR LIFE→
4.BECAUSE OF YOUR SMILE YOU MAKE LIFE MORE BEAUTIFUL---THICK NHATNANCH
5.DO NOT DWELL IN THE PAST DO NOT DREAM OF THE FUTURE CONCERNTRATE THE MIND ON PRESENT DAY→→→ budhha

6.LIVE LIFE TO THE FULLEST AND FOCUS ON THE POSITIVE→MATT CAMERAN

7.LIFE IS LIKE RIDING A BICYCLE TO KEEP YOUR BALANCE YOU MUST KEEP MOVING →ALBERT EINSTIEN
8.LIFE IS REALLY SIMPLE BUT WE INSIST ON MAKING IT COMPLICATED→CONFUCIUS

9.JUST AS A CANDLE CANNOT BURN WITHOUT FIRE MEN CANNOT LIVE A SPRITUAL LIFE→BUDDHA

10.THE LIFE IS LIKE A SWIMIMING POOL . YOU DIVE INTON THE WATER BUT YOU CANNOT SEE HOE DEEP IT IS →DENNIS RODMAN
11, THE GREATEST PLEASURE OF THE LIFE IS LOVE

Thursday, April 19, 2018

mark zukerberg ki best thougt in hindi

Best known for founding the social media empire Facebook, Mark Zuckerberg went from coding in his Harvard dorm room to becoming one of the most influential and recognizable entrepreneurs of our time.  The youngest billionaire ever, Mark Zuckerberg encourages everyone to focus on the bigger picture and how to achieve success while making a change in the world & following your passion
यहां मार्क ज़करबर्ग के 35 सर्वश्रेष्ठ उद्धरण हैं:
1. "मुझे लगता है कि व्यवसाय का एक साधारण नियम यह है कि, यदि आप पहले ऐसी चीजें करते हैं जो पहले आसान होते हैं, तो आप वास्तव में बहुत प्रगति कर सकते हैं।" - मार्क जुकरबर्ग“I think a simple rule of business is, if you do things that are easier first, then you can actually make a lot of progress.” – Mark Zuckerberg

2. "जब मैं 1 9 वर्ष का था, तब मैंने साइट शुरू की। मुझे फिर से व्यवसाय के बारे में बहुत कुछ नहीं पता था।" - मार्क जुकरबर्ग “I started the site when I was 19. I didn’t know much about business back then.” – Mark Zuckerberg

3. "लोग वास्तव में स्मार्ट हो सकते हैं या कौशल जो सीधे लागू होते हैं, लेकिन यदि वे वास्तव में इसमें विश्वास नहीं करते हैं, तो वे वास्तव में कड़ी मेहनत नहीं करेंगे।" - मार्क जुकरबर्ग

“People can be really smart or have skills that are directly applicable, but if they don’t really believe in it, then they are not going to really work hard.” – Mark Zuckerberg


4. "जिस सवाल से मैं खुद से लगभग हर दिन पूछता हूं, क्या मैं सबसे महत्वपूर्ण काम कर रहा हूं?" - मार्क जुकरबर्ग “The question I ask myself like almost every day is,’Am I doing the most important thing I could be doing?’” – Mark Zuckerberg

5. "उस चीज़ को ढूंढें जिसके बारे में आप बहुत भावुक हैं।" - मार्क जुकरबर्ग“Find that thing you are super passionate about.” – Mark Zuckerberg


6. "सीधे शब्दों में कहें: हम पैसा बनाने के लिए सेवाओं का निर्माण नहीं करते हैं; हम बेहतर सेवाओं के निर्माण के लिए पैसे कमाते हैं। "- मार्क जुकरबर्गSimply put: we don’t build services to make money; we make money to build better services.” – Mark Zuckerberg


7. "किसी को भी आप को बदलने के लिए न कहें कि आप कौन हैं।" - मार्क जुकरबर्ग. “Don’t let anyone tell you to change who you are.” – Mark Zuckerberg


8. "हमारे समाज को अधिक नायकों की जरूरत है जो वैज्ञानिक, शोधकर्ता और इंजीनियरों हैं। हमें उन लोगों का जश्न मनाने और इनाम देने की ज़रूरत है जो रोगों का इलाज करते हैं, मानवता की हमारी समझ का विस्तार करते हैं और लोगों के जीवन में सुधार के लिए काम करते हैं। "- मार्क जुकरबर्ग“Our society needs more heroes who are scientists, researchers, and engineers. We need to celebrate and reward the people who cure diseases, expand our understanding of humanity and work to improve people’s lives.” – Mark Zuckerberg


9। "भय पर आशा चुनने के लिए साहस होता है।" - मार्क जुकरबर्ग“It takes courage to to choose hope over fear.” – Mark Zuckerberg


10. "यदि आप केवल अपनी पसंद की सामग्री पर काम करते हैं और आप इसके बारे में भावुक हैं, तो आपके पास मास्टर प्लान नहीं होना चाहिए कि चीजें कैसे खेलेंगी।" - मार्क जुकरबर्ग
11. "दीवारों के निर्माण के बजाय, हम पुलों का निर्माण करने में मदद कर सकते हैं।" - मार्क जुकरबर्ग
12. "इतने सारे व्यवसाय इस बात के बारे में चिंतित हैं कि वे गलती कर सकते हैं, वे कोई जोखिम लेने से डरते हैं। कंपनियां स्थापित की गई हैं ताकि लोग विफलता पर एक-दूसरे का न्याय कर सकें। "- मार्क जुकरबर्ग

13. "लोग जो कहते हैं उसके बारे में परवाह नहीं करते हैं, वे आपके निर्माण के बारे में परवाह करते हैं।" - मार्क जुकरबर्ग
14. "यदि आप हमेशा वास्तविक पहचान के दबाव में रहते हैं, तो मुझे लगता है कि यह एक बोझ है।" - मार्क ज़करबर्ग
15. "यह एक विकृत बात है, व्यक्तिगत रूप से, लेकिन मैं एक चक्र में रहना चाहता हूं जहां लोग हमें कमजोर कर रहे हैं। यह हमें बाहर जाने और बड़े दांव बनाने के लिए अक्षांश देता है जो लोगों को उत्साहित और आश्चर्यचकित करता है। "- मार्क जुकरबर्ग
16. "किताबें आपको पूरी तरह से एक विषय का पता लगाने की अनुमति देती हैं और आज अपने मीडिया को गहन तरीके से विसर्जित कर देती हैं।" - मार्क ज़करबर्ग
17. "किसी भरोसेमंद दोस्त की सिफारिश से लोगों को कुछ भी प्रभावित नहीं करता है।" - मार्क जुकरबर्ग
18. "मेरा नंबर सलाह का एक टुकड़ा है: आपको सीखना चाहिए कि प्रोग्राम कैसे करें।" - मार्क जुकरबर्ग
19. "काम करने और किसी व्यक्ति के रूप में सीखने और विकसित होने के मामले में, जब आप लोगों के दृष्टिकोण प्राप्त करते हैं तो आप और अधिक बढ़ते हैं। मैं वास्तव में कंपनी के मिशन को आजमाकर जीता हूं और अपने जीवन में सबकुछ बहुत ही सरल रखता हूं। "- मार्क जुकरबर्ग
20. "मुझे लगता है कि लोगों को यह व्यक्त करने की मूल इच्छा है कि वे कौन हैं। और मुझे लगता है कि यह हमेशा अस्तित्व में है। "- मार्क जुकरबर्ग
21. "अरबों लोगों को जोड़ने में मदद करना आश्चर्यजनक, नम्र और उस चीज़ से किराया है जो मुझे अपने जीवन में सबसे गर्व है।" - मार्क जुकरबर्ग

22. "लोगों को साझा करने की शक्ति देकर, हम दुनिया को और अधिक पारदर्शी बना रहे हैं।" - मार्क जुकरबर्ग
23. "विज्ञापन सबसे प्रभावी ढंग से काम करता है जब यह पहले से ही क्या करने की कोशिश कर रहा है।" - मार्क जुकरबर्ग
24. "लोगों को आपको रोकना न दें। इसी तरह आप ऐसा करते हैं। "- मार्क ज़करबर्ग
25. "यह महत्वपूर्ण है कि युवा उद्यमियों को पता होना चाहिए कि वे क्या जानते नहीं हैं।" - मार्क ज़करबर्ग
26. "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उद्यमियों को जो कुछ करना चाहिए, वह उस चीज़ को चुनना है जिस पर वे परवाह करते हैं, उस पर काम करते हैं, लेकिन वास्तव में इसे तब तक कंपनी में बदलने के लिए प्रतिबद्ध नहीं करते जब तक कि यह वास्तव में काम नहीं करता।" - मार्क जुकरबर्ग
27. "तेजी से आगे बढ़ो और चीजों को तोड़ो। जब तक आप सामान तोड़ नहीं रहे हैं, आप पर्याप्त तेज़ी से आगे नहीं बढ़ रहे हैं। "- मार्क जुकरबर्ग
28. "कनेक्टिविटी एक मानव अधिकार है।" - मार्क जुकरबर्ग
2 9। "जब आप सभी को आवाज देते हैं और लोगों को शक्ति देते हैं, तो सिस्टम आमतौर पर वास्तव में अच्छी जगह पर समाप्त होता है। तो, हम अपनी भूमिका को किस तरह देखते हैं, लोगों को वह शक्ति दे रहा है। "- मार्क जुकरबर्ग
30. "लोगों को साझा करने की शक्ति देकर, हम दुनिया को और अधिक पारदर्शी बना रहे हैं।" - मार्क जुकरबर्ग
31. "हैक वे इमारत के लिए एक दृष्टिकोण है जिसमें निरंतर सुधार और पुनरावृत्ति शामिल है। हैकर्स का मानना है कि कुछ हमेशा बेहतर हो सकता है, और यह कि कुछ भी पूरा नहीं हुआ है। "- मार्क जुकरबर्ग
32. "मैं यहां तक कि लंबी अवधि के लिए कुछ बनाने के लिए हूं। कुछ और एक व्याकुलता है। "- मार्क जुकरबर्ग
33. "यदि आप वर्षों से स्थिर हैं तो आपको स्थिरता की प्रतिष्ठा मिलती है।" - मार्क जुकरबर्ग
34. "सवाल यह नहीं है कि हम लोगों के बारे में क्या जानना चाहते हैं? ', यह है,' लोग अपने बारे में क्या कहना चाहते हैं? '" - मार्क जुकरबर्ग
35. "यदि आप कुछ महान बनाना चाहते हैं, तो आपको फोकस करना चाहिए

MAHADEVI VERMA POEMS IN HINDI

            

महादेवी वर्मा

     (26 मार्च, 1907 — 11 सितंबर, 1987) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों जयशंकर प्रसादसूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" और सुमित्रानंदन पंत के साथ महत्वपूर्ण स्तंभ मानी जाती हैं। उन्हें आधुनिक मीराबाई भी कहा गया है। कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है।
उन्होंने अध्यापन से अपने कार्यजीवन की शुरूआत की और अंतिम समय तक वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या बनी रहीं। उनका बाल-विवाह हुआ परंतु उन्होंने अविवाहित की भांति जीवन-यापन किया। प्रतिभावान कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा साहित्य और संगीत में निपुण होने के साथ साथ कुशल चित्रकार और सृजनात्मक अनुवादक भी थीं। उन्हें हिन्दी साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। गत शताब्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला साहित्यकार के रूप में वे जीवन भर पूजनीय बनी रहीं। वे भारत की 50 सबसे यशस्वी महिलाओं में भी शामिल हैं।

1.मैं नीर भरी दु:ख की बदली!

स्पंदन में चिर निस्पंद बसा,
क्रन्दन में आहत विश्व हंसा,
नयनों में दीपक से जलते,
पलकों में निर्झरिणी मचली!

मेरा पग-पग संगीत भरा,
श्वासों में स्वप्न पराग झरा,
नभ के नव रंग बुनते दुकूल,
छाया में मलय बयार पली,

मैं क्षितिज भॄकुटि पर घिर धूमिल,
चिंता का भार बनी अविरल,
रज-कण पर जल-कण हो बरसी,
नव जीवन अंकुर बन निकली!

पथ को न मलिन करता आना,
पद चिन्ह न दे जाता जाना,
सुधि मेरे आगम की जग में,
सुख की सिहरन बन अंत खिली!

विस्तृत नभ का कोई कोना,
मेरा न कभी अपना होना,
परिचय इतना इतिहास यही 
उमड़ी कल थी मिट आज चली!

2.तुम मुझमें प्रिय, फिर परिचय क्या!

तारक में छवि, प्राणों में स्मृति
पलकों में नीरव पद की गति
लघु उर में पुलकों की संस्कृति
भर लाई हूँ तेरी चंचल
और करूँ जग में संचय क्या?

तेरा मुख सहास अरूणोदय
परछाई रजनी विषादमय
वह जागृति वह नींद स्वप्नमय,
खेल-खेल, थक-थक सोने दे
मैं समझूँगी सृष्टि प्रलय क्या?

तेरा अधर विचुंबित प्याला
तेरी ही विस्मत मिश्रित हाला
तेरा ही मानस मधुशाला
फिर पूछूँ क्या मेरे साकी
देते हो मधुमय विषमय क्या?

चित्रित तू मैं हूँ रेखा क्रम,
मधुर राग तू मैं स्वर संगम
तू असीम मैं सीमा का भ्रम
काया-छाया में रहस्यमय
प्रेयसी प्रियतम का अभिनय क्या?

3.पथ देख बिता दी रैन
मैं प्रिय पहचानी नहीं!

तम ने धोया नभ-पंथ
सुवासित हिमजल से;
सूने आँगन में दीप
जला दिये झिल-मिल से;
आ प्रात बुझा गया कौन
अपरिचित, जानी नहीं!
मैं प्रिय पहचानी नहीं!

धर कनक-थाल में मेघ
सुनहला पाटल सा,
कर बालारूण का कलश
विहग-रव मंगल सा,
आया प्रिय-पथ से प्रात-
सुनायी कहानी नहीं!
मैं प्रिय पहचानी नहीं !

नव इन्द्रधनुष सा चीर
महावर अंजन ले,
अलि-गुंजित मीलित पंकज-
-नूपुर रूनझुन ले,
फिर आयी मनाने साँझ
मैं बेसुध मानी नहीं!
मैं प्रिय पहचानी नहीं!

इन श्वासों का इतिहास
आँकते युग बीते;
रोमों में भर भर पुलक
लौटते पल रीते;
यह ढुलक रही है याद
नयन से पानी नहीं!
मैं प्रिय पहचानी नहीं!

अलि कुहरा सा नभ विश्व
मिटे बुद्‌बुद्‌‌-जल सा;
यह दुख का राज्य अनन्त
रहेगा निश्चल सा;
हूँ प्रिय की अमर सुहागिनि
पथ की निशानी नहीं!
मैं प्रिय पहचानी नहीं!
SUCCESSPEDIA

Wednesday, April 18, 2018

HINDI BAAL KAVITAYEN


1अकड़म-बकड़म

अकड़म-बकड़म ठंडम ठा।
याद आ गई माँ की माँ।
सूरज, तू जल्दी से आ।
धूप गुनगुनी ढ़ोकर ला।।
अकड़म-बकड़म ठंडम ठा।
ऐसे में मत कहो नहा।
सूरज, तू जल्दी से आ।
आ बिस्तर से हमें उठा।।
अकड़म-बकड़म ठंडम ठा।
गरमागरम जलेबी खा।
सूरज, तू जल्दी से आ।
आ बुढ़िया की जान बचा।।
अकड़म-बकड़म ठंडम ठा।
जा सर्दी अपने घर जा।।


आओ, प्यारे तारो आओ


2.आओ, प्यारे तारो आओ
तुम्हें झुलाऊँगी झूले में,
तुम्हें सुलाऊँगी फूलों में,
तुम जुगनू से उड़कर आओ,
मेरे आँगन को चमकाओ।


3.चूहा एक ऊँट पर चढ़,
झटपट चला बहादुरगढ़।
राह में गहरा ताल पड़ा,
चूहे का ननिहाल पड़ा।
चूहा खा-पी सो गया,
ऊँट नहाकर खो गया!

4.ओ री तितली, कहाँ चली तू,
कितनी अच्छी और भली तू!

खूब सँवरकर जब आती है,
रंगों का गाना गाती है।

फूल देखते रह जाते हैं,
खिल-खिल हँसते-मुसकाते हैं।

पंखों में उनकी खुशबू ले,
और हवाओं में बिखरा दे!



5.  यह कागज की नाव हमारी,
यह टब बना समुंदर भारी।
मुन्नी चुन्नी चम्पा भोला,
मोहन सोहन श्याम मुरारी।

इस सागर के खड़े किनारे,
हम सब संगी साथी प्यारे।
अपनी नाव चलाते हैं हम,
इधर न आ तू तेज हवा रे ।

हम सब भारत माँ चाकर,
हम सब वीर साहसी सुंदर।
बन्धन मुक्त करेंगे जग को,
सचमुच के जलयान चलाकर।

subhadra kumari chauhan poems IN HINDI

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म प्रयाग में ठाकुर रामनाथ सिंह के घर हुआ। शिक्षा भी प्रयाग में ही हुई। सुभद्रा कुमारी बाल्यावस्था से ही देश-भक्ति की भावना से प्रभावित थीं। इन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया। विवाह के पश्चात भी राजनीति में सक्रिय भाग लेती रहीं। दुर्भाग्यवश मात्र 43 वर्ष की अवस्था में एक दुर्घटना में इनकी मृत्यु हो गई। इनकी रचनाएँ हैं- 'मुकुल (कविता-संग्रह), 'बिखरे मोती (कहानी संग्रह), 'सीधे-सादे चित्र और 'चित्रारा। 'झाँसी की रानी इनकी बहुचर्चित रचना है। इन्हें 'मुकुल तथा 'बिखरे मोती पर अलग-अलग सेकसरिया पुरस्कार मिले।


1.यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। 
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥ 

ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली। 
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली॥ 

तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता। 
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता॥ 

वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता। 
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता॥ 

बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता। 
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता॥ 

तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे। 
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे॥ 

तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता। 
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता॥ 

तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती। 
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं॥ 

इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे। 
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे॥

2.

वीरों का कैसा हो वसंत / सुभद्राकुमारी चौहान

आ रही हिमालय से पुकार
है उदधि गरजता बार बार
प्राची पश्चिम भू नभ अपार;
सब पूछ रहें हैं दिग-दिगन्त
वीरों का कैसा हो वसंत

फूली सरसों ने दिया रंग
मधु लेकर आ पहुंचा अनंग
वधु वसुधा पुलकित अंग अंग;
है वीर देश में किन्तु कंत
वीरों का कैसा हो वसंत

भर रही कोकिला इधर तान
मारू बाजे पर उधर गान
है रंग और रण का विधान;
मिलने को आए आदि अंत
वीरों का कैसा हो वसंत

गलबाहें हों या कृपाण
चलचितवन हो या धनुषबाण
हो रसविलास या दलितत्राण;
अब यही समस्या है दुरंत
वीरों का कैसा हो वसंत

कह दे अतीत अब मौन त्याग
लंके तुझमें क्यों लगी आग
ऐ कुरुक्षेत्र अब जाग जाग;
बतला अपने अनुभव अनंत
वीरों का कैसा हो वसंत

हल्दीघाटी के शिला खण्ड
ऐ दुर्ग सिंहगढ़ के प्रचंड
राणा ताना का कर घमंड;
दो जगा आज स्मृतियां ज्वलंत
वीरों का कैसा हो वसंत

भूषण अथवा कवि चंद नहीं
बिजली भर दे वह छन्द नहीं
है कलम बंधी स्वच्छंद नहीं;
फिर हमें बताए कौन हन्त
वीरों का कैसा हो वसंत

3.

खिलौनेवाला / सुभद्राकुमारी चौहान

वह देखो माँ आज
खिलौनेवाला फिर से आया है।
कई तरह के सुंदर-सुंदर
नए खिलौने लाया है।

हरा-हरा तोता पिंजड़े में
गेंद एक पैसे वाली
छोटी सी मोटर गाड़ी है
सर-सर-सर चलने वाली।

सीटी भी है कई तरह की
कई तरह के सुंदर खेल
चाभी भर देने से भक-भक
करती चलने वाली रेल।

गुड़िया भी है बहुत भली-सी
पहने कानों में बाली
छोटा-सा 'टी सेट' है
छोटे-छोटे हैं लोटा थाली।

छोटे-छोटे धनुष-बाण हैं
हैं छोटी-छोटी तलवार
नए खिलौने ले लो भैया
ज़ोर-ज़ोर वह रहा पुकार।

मुन्‍नू ने गुड़िया ले ली है
मोहन ने मोटर गाड़ी
मचल-मचल सरला करती है
माँ ने लेने को साड़ी

कभी खिलौनेवाला भी माँ
क्‍या साड़ी ले आता है।
साड़ी तो वह कपड़े वाला
कभी-कभी दे जाता है

अम्‍मा तुमने तो लाकर के
मुझे दे दिए पैसे चार
कौन खिलौने लेता हूँ मैं
तुम भी मन में करो विचार।

तुम सोचोगी मैं ले लूँगा।
तोता, बिल्‍ली, मोटर, रेल
पर माँ, यह मैं कभी न लूँगा
ये तो हैं बच्‍चों के खेल।

मैं तो तलवार खरीदूँगा माँ
या मैं लूँगा तीर-कमान
जंगल में जा, किसी ताड़का
को मारुँगा राम समान।

तपसी यज्ञ करेंगे, असुरों-
को मैं मार भगाऊँगा
यों ही कुछ दिन करते-करते 
रामचंद्र मैं बन जाऊँगा।

यही रहूँगा कौशल्‍या मैं
तुमको यही बनाऊँगा।
तुम कह दोगी वन जाने को
हँसते-हँसते जाऊँगा।

पर माँ, बिना तुम्‍हारे वन में
मैं कैसे रह पाऊँगा।
दिन भर घूमूँगा जंगल में
लौट कहाँ पर आऊँगा।

किससे लूँगा पैसे, रूठूँगा
तो कौन मना लेगा
कौन प्‍यार से बिठा गोद में
मनचाही चींजे़ देगा।